झारखंड हाई कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को मजबूती देते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि बुजुर्ग माता-पिता को अपने ही बेटे-बहू से मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही हो, तो बेटा-बहू उनके स्व-अर्जित मकान में जबरन रहने का दावा नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति की पीठ ने कहा कि संतान का अधिकार केवल उत्तराधिकार तक सीमित है, इसे तत्काल स्वामित्व नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि कानून का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान, सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन देना है। मामले में रामगढ़ के एक बुजुर्ग दंपति की याचिका स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने उपायुक्त के आदेश को निरस्त कर दिया और स्पष्ट संदेश दिया कि उत्पीड़न की स्थिति में संपत्ति पर अधिकार माता-पिता का ही रहेगा। यह फैसला देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक मजबूत कानूनी मिसाल माना जा रहा है।
Jharkhand News: बुजुर्ग माता-पिता की संपत्ति पर जबरन कब्जा नहीं कर सकते बेटा-बहू-झारखंड हाई कोर्ट



